Mangalmaya Jivan-Mrityu (Urdu)
Mangalmaya Jivan-Mrityu (Urdu)

Mangalmaya Jivan-Mrityu (Hindi)

   

"मंगलमय जीवन-मृत्यु"  मृत्यु एक अनिवार्य घटना है जिससे कोई बच नहीं सकता । मृत्यु से सारी जीवनसृष्टि भयभीत है । इस भय से मुक्त होने का कोई मार्ग है ? प्राचीनकाल से ही पल्लवित-पुष्पित हुई भारतीय अध्यात्मविद्या में इसका ठोस उपाय है । पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने अपने सत्संगों में इसका बड़ा ही सूक्ष्म विवेचन किया है । मृत्यु के भय से आक्रांत मानव-समुदाय को निर्भयता का यह परम संदेश है । इस ‘मंगलमय जीवन-मृत्यु’ पुस्तिका में प्रस्तुत पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का अमृत-प्रसाद पाकर आप भी जीवन-मृत्यु की समस्या सुलझाकर अपने भीतर निरंतर गूँजते हुए शाश्वत जीवन का सुर सुन के परम निर्भय होकर अपने जीवन और मृत्यु को मंगलमय बना सकते हैं । इसमें जानेंगे :

* मत्यु और जीवन क्या है ?

* मृत्यु कितने प्रकार की होती है ?

* मृत्यु भी जीवन के समान आवश्यक कैसे ?

* सिकंदर ने अमृत क्यों नहीं पिया ?

* बिना मृत्यु को जाने, जीवन जीवन नहीं

* मृत्यु किसकी होती है ?

* बालि के मरने पर भगवान श्रीराम और तारा का संवाद

* मृत्यु : केवल वस्त्र-परिवर्तन

* फकीरी मौत : आनंदमय जीवन का द्वार

* यमराज और नचिकेता का संवाद

* सच्चे संत मृत्यु का रहस्य समझाते हैं

* मृत्यु : एक विश्रांति-स्थान

* वासना की मृत्यु के बाद परम विश्रांति

* घाटवाले बाबा का एक प्रसंग

* फकीरी मौत ही असली जीवन

* सुकरात का शरीर छोड़ते समय का अनुभव

* अध्यात्मविद्या : भारत की विशेषता

* आयु से ज्ञान का कोई संबंध नहीं

* योग भी साधना का आखिरी शिखर नहीं

* हे अकाल आत्मा ! अपनी महिमा में जागो

* जीवन और मृत्यु आत्मा-परमात्मा को पाने के दो पहलू

* विदुरजी का धृतराष्ट्र से संसार के स्वरूप, उसकी भयंकरता और उससे छूटने के उपाय विषयक वर्णन

* क्या इच्छाओं की तृप्ति का कोई उपाय है ?

* कामवासना से मुक्त होने का उपाय

* जो मरता है वह हम नहीं...

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