Sada Diwali (Bangla)
Sada Diwali (Bangla)

सदा दिवाली (बांगला)

   
हर व्यक्ति की चाह होती है सदा सुखी रहने की, सदा खुश रहने की । इस माँग की पूर्ति आत्मज्ञानी महापुरुषों के अमृत-उपदेश से ही सम्भव है । ‘सदा दिवाली’ पुस्तक में संत श्री आशारामजी बापू के अमृत-वचनों का संकलन है, जिनका आदरपूर्वक मनन कर आप भी अपने जीवन में हररोज दिवाली, हरक्षण दिवाली मना सकते हैं । इस सत्साहित्य में है :
* नूतनवर्ष के प्रथम दिन करने योग्य कार्य
* फिर तो आपकी सदा दिवाली...
* लक्ष्मीजी का वाहन उल्लू हमें क्या संकेत देता है ?
* नवप्रभात में आत्म-प्रसाद का ऐसे करें पान
* कार्य को सफल बनाने की युक्ति
* सुखी रहना हो तो किन लोगों से वैर-विरोध नहीं करना चाहिए ?
* जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए पालनीय शास्त्रीय नियम
* व्यवहार और परमार्थ सुधारने का उत्तम मार्ग क्या है ?
* भारत की अध्यात्मविद्या एवं संस्कृति की महानता के आगे पाश्चात्य हुआ शरणागत
* जिंदगी में तू किसीके काम आना सीख ले...
* ईसाईयत के प्रचारक ने हिन्दू धर्म की महिमा समझी तो स्वयं हिन्दू बन गया
* भौतिकवाद, विलासी जीवन से कैसे छुटकारा पायें ?
* बेचारे, कंगाल और गरीब कौन और सबसे सुखी कौन ?
* अब जरा अपने आत्मा में आराम पाओ
* इसे पायें और महान हो जायें
* आपका परम मंगल और पूर्ण कल्याण किसमें है ?
* सदा के लिए अज्ञानांधकार कैसे मिटे ?
* आत्मारामी वायस की आत्मानुभव सम्पन्न बातें
* ब्रह्मज्ञानी सच्चे हितैषी है !
* मनी आज अच्छी दिवाली हमारी (काव्य)
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