Prerak Prasang (Bangla)
Prerak Prasang (Bangla)

प्रेरक प्रसंग (बांगला)

   
 

सत्प्रसंगों की ऐसी महिमा है कि उन्हें पढ़ते-सुनते उनमें रुचि पैदा होती है । धीरे-धीरे वह रुचि उनमें गुणबुद्धि रखने लगती है । फिर तो यह मार्ग सिद्धांत-सा बनकर मस्तिष्क में छा जाता है और हम वैसे ही बन जाते हैं । ऐसे परम पवित्र, जीवनोद्धारक प्रसंगों को आत्मनिष्ठ पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी के माध्यम से आपके हृदय में उतारने का प्रयास है ‘महापुरुषों के प्रेरक-प्रसंग’ सद्ग्रंथ । महापुरुषों के ये जीवन-प्रसंग बालक, किशोर, युवक, विद्यार्थी, बड़े-बुजुर्ग तथा सदाचारी-दुराचारी, सगुरे-निगुरे - सभीके लिए प्रेरणादायी हैं, हितकारी हैं । ‘महापुरुषों के प्रेरक-प्रसंग’ पुस्तक में है :
* शिव-पूजन का जल मरणासन्न को पिलाया, आत्मशिव की प्रसन्नता की आवाज हृदय-मंदिर से आयी
* स्वामी रामतीर्थ और अमेरिका की एक सुंदर युवती का प्रेरक प्रसंग
* भगवान के लिए रोना, जन्म-मरण के दुःख से है पार होना (हरिबाबा ने दी युक्ति)
* अबोध व निर्दोष ग्वाले के सामने प्रकटे भगवान शिवजी
* अपनी किसी सफलता पर गर्व न कर (कथा-प्रसंग)
* गुरुसेवा में अहं सजानेवाले को मिली रीछ की योनि
* मन का ही खाना तो देशी घी के लड्डू क्यों नहीं खाना !
* जिंदगी में तू किसीके काम आना सीख ले...
* लाला ने ही ऐसी लीला की
* चल पड़े तो चल पड़े...
* राजा चोरी करता है ?
* दंडवत् प्रणाम का रहस्य
* गांधीजी की परदुःखकातरता और सच्चाई
* संत-सान्निध्य से जीवन-परिवर्तन
* क्यों गंदा बंदा बनता है ?
* प्राणिमात्र की आशाओं के राम
* वह तो मारकर भी खिलाता है !
* रुद्रदेव की सत्यनिष्ठा के आगे डाकू हुए शरणागत
* ...इसलिए कर्म करने में सावधान रहना चाहिए
* श्री जगदीशचन्द्र बसु की पत्नी अबला बसु का त्याग और साहस
* अंत समय कुछ हाथ न आये...
* बचपन में ऐसे थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस
* यह कंजूसी नहीं, करकसर है
* फिजूल में एक पैसा नहीं, सत्कार्य में लाखों सही
* एक दहेज ऐसा भी !
* हंटरबाज थानेदार से बने संत रणजीतदास
* ज्ञान व योग-सामर्थ्य की प्रतिमूर्ति : स्वामी लीलाशाहजी महाराज
* संत-सेवा का फल क्या है ?
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